तुम से तुम तक – आर्य और अनु की कहानी
कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहाँ उम्र, सोच और हालात के फर्क के बावजूद दिल एक-दूसरे से बात करने लगते हैं।
आर्य और अनु की कहानी भी कुछ ऐसी ही है — एक ऐसी प्रेम कहानी, जो समाज की सीमाओं से आगे जाकर सिर्फ़ एहसासों पर टिकी है।
आर्य एक परिपक्व, गंभीर और ज़िम्मेदार इंसान है। उसके चेहरे पर हमेशा आत्मविश्वास झलकता है, लेकिन उसकी आँखों में एक अधूरापन भी छुपा है। ज़िंदगी ने उसे बहुत कुछ दिया है — पैसा, इज़्ज़त, मुक़ाम — पर सुकून नहीं।
वहीं दूसरी ओर अनु, एक सादगी भरी, मासूम लेकिन आत्मसम्मान से भरी लड़की है। उसकी मुस्कान में निश्चलता है और उसकी आँखों में सपने। वह ज़िंदगी को दिल से जीना जानती है।
दोनों की पहली मुलाक़ात अचानक होती है — एक भीड़ भरे बाज़ार में।
आर्य अपनी सोच में डूबा हुआ था, और तभी अनु उससे टकरा जाती है। माफ़ी मांगते हुए अनु की नज़र झुक जाती है, लेकिन आर्य की नज़र वहीं ठहर जाती है।
उसी पल, बिना कुछ कहे, दोनों के दिलों में कुछ बदल जाता है।
अनु के लिए आर्य सिर्फ़ एक अजनबी था, लेकिन आर्य के लिए अनु एक ऐसा एहसास बन गई थी जिसे वह समझ नहीं पा रहा था।
उम्र का फ़र्क, समाज की बातें और अपनी ज़िम्मेदारियाँ — सब उसे रोक रही थीं।
लेकिन दिल… दिल तो चुप नहीं रहता।
धीरे-धीरे हालात ऐसे बने कि दोनों की मुलाक़ातें बढ़ने लगीं।
आर्य की सख़्त आवाज़ में अनु को अपनापन महसूस होता, और अनु की मासूम बातें आर्य के दिल को सुकून देतीं।
आर्य को एहसास हुआ कि अनु के साथ वह खुद को हल्का महसूस करता है — जैसे बरसों बाद उसने खुलकर सांस ली हो।
अनु भी आर्य के प्रति आकर्षित होने लगी थी, लेकिन वह डरती थी।
उसे पता था कि समाज क्या कहेगा।
“लोग उंगलियाँ उठाएँगे,”
“लोग सवाल करेंगे,”
“लोग इसे ग़लत कहेंगे।”
एक दिन अनु ने हिम्मत करके आर्य से कहा,
“हमारे बीच जो है… क्या वो सही है?”
आर्य ने पहली बार बिना किसी झिझक के जवाब दिया,
“सही या ग़लत का फैसला लोग करते हैं।
मैं बस इतना जानता हूँ कि तुम्हारे साथ मैं खुद को पूरा महसूस करता हूँ।”
यह सुनकर अनु की आँखें भर आईं।
वह समझ गई कि यह रिश्ता आसान नहीं होगा, लेकिन सच्चा ज़रूर है।
समाज ने सवाल उठाए।
परिवार ने विरोध किया।
लोगों ने बातें बनाईं।
लेकिन आर्य एक चट्टान की तरह अनु के साथ खड़ा रहा।
उसने कहा,
“अगर प्यार करना गुनाह है, तो मैं ये गुनाह सौ बार करूंगा।”
अनु ने भी डर से आगे बढ़कर आर्य का हाथ थाम लिया।
उसने सीखा कि प्यार में उम्र नहीं, समझ मायने रखती है।
समय के साथ, लोगों की बातें फीकी पड़ने लगीं।
जो रिश्ता मज़बूत होता है, वह हर तूफ़ान झेल लेता है।
“तुम से तुम तक” सिर्फ़ दो लोगों की कहानी नहीं है —
यह उस हिम्मत की कहानी है जो प्यार को स्वीकार करने के लिए चाहिए।
यह उस भरोसे की कहानी है जो दो दिलों को जोड़ता है।
और यह उस सफ़र की कहानी है जहाँ
एक इंसान
दूसरे इंसान तक
और फिर
खुद तक पहुँचता है।

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